100Hindi Ghajal
#1
दुनिया का मेला
विधा : कविता

दुनिया के मेले में
हर कोई अकेला हैं।
हैं बहुत भीड़ पर
इंसान अकेला हैं।
फिर भी अपनो को
भीड़ में ढूँढ रहा हैं।
जबकि उसे पता हैं
आनाजाना उसे अकेला हैं।
ये दुनिया का मेला भी
एक बड़ा झलेमा हैं।।

मेले में रिश्ते बनाते हैं
और उनको निभाते हैं।
कभी रिश्ते बचाते हैं
कभी खुदको बचाते हैं।
पर मेले के झमेले में
अपने ही खो जाते हैं।
फिर न रिश्ते रहते हैं
और न अपने रहते हैं।
रह जाता है तो सिर्फ
दुनिया का एक मेला।।

रिश्तों को दिलो में
जो सजाकर रखते हैं।
वो चाहे भीड़ हो या
दुनिया का मेला झमेला।
पर अपनो को दिलसे
निकाल नहीं पाते हैं।
और अपने रिश्तों को
दिल से निभाते हैं।
लेकिन दुनिया के
मेले में वो अकेले हैं।
वो बहुत अकेले हैं।।

रिश्तें
विधा : कविता

कभी रिश्ते बनाते है
कभी उनको निभाते है।
कभी रिश्ते बचाते है
कभी खुदको बचाते है।
इन दोनों कर चक्कर में
अपनो को खो देते है।
फिर न रिश्ते रहते है
और न अपने रहते है।।

जो रिश्तों को दिलो में
संभलकर खुद रखते है।
और लोगों को रिश्तों के
सदा उदाहरण देते है।
और रिश्तें क्या होते है
परिभाषा इसकी बताते है।
और रिश्तों के द्वारा ही
घर परिवार बनाते है।।

कई माप दण्ड होते है
हमारे रिश्तों के लोगों।
कही माँ बाप का तो
कही बहिन भाई का।
किसी किसीके तो पड़ोसी
इनसे भी करीब होते है।
जो सुखदुख में पहले
अपना रिश्ता निभाते है।।

रिश्तों का अर्थ स्नेह और
मैत्री भाव से समझाते है।
और रिश्तों की खातिर
समान भाव रखते है।
और अपने रिश्तों को
अमर करके जाते है।
और अमर हो जाते है।।
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#2
Better response on post RE: Hindi Ghajalदिल छोड़ के कुछ और ही मांगा करो हम से....

हम टूटी हुई चीज़ का यारो तोहफा नहीं देते....
1 total thanks
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#3
Better response on post RE: Hindi GhajalI'm confused, I can't read anymore!
1 total thanks
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#4
Better response on post RE: Hindi Ghajalok next time i will post in English language
1 total thanks
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